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18 Jun

पर्यटन के राष्ट्रीय मानचित्र पर चमकी छत्तीसगढ़ की संस्कृति

छत्तीसगढ़ ने संस्कृति पर्यटन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। गोवा में आयोजित इंडिया टुडे टूरिज्म समिट एंड अवॉर्ड्स-2026 में राज्य को ‘सांस्कृतिक पर्यटन विजेता’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय परंपराओं, लोककला और पर्यटन विकास के क्षेत्र में किए गए प्रयासों की पहचान है।

केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने यह पुरस्कार प्रदान किया, जबकि राज्य की ओर से पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने इसे ग्रहण किया। कार्यक्रम में गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत समेत कई राज्यों के पर्यटन मंत्री, पर्यटन विशेषज्ञ और उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद रहे।

सांस्कृतिक विरासत बनी पहचान

पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ ने अपनी लोक संस्कृति, जनजातीय परंपराओं, हस्तशिल्प, लोक उत्सवों और ऐतिहासिक धरोहरों को पर्यटन से जोड़ने की दिशा में लगातार काम किया है। इसी का परिणाम है कि राज्य आज केवल प्राकृतिक सौंदर्य और जलप्रपातों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी जीवंत संस्कृति और परंपराओं के लिए भी देशभर में पहचान बना रहा है।

पर्यटन के राष्ट्रीय मानचित्र पर चमकी छत्तीसगढ़ की संस्कृति

पर्यटन मॉडल की राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा

समिट के दौरान आयोजित एक विशेष परिचर्चा में छत्तीसगढ़ का पर्यटन मॉडल चर्चा का केंद्र रहा। इस अवसर पर पर्यटन विभाग और पर्यटन बोर्ड के अधिकारियों ने राज्य में पर्यटन विकास, निवेश की संभावनाओं और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से जानकारी दी। चर्चा में बताया गया कि स्थानीय समुदायों की भागीदारी के साथ पर्यटन को सांस्कृतिक संरक्षण और आर्थिक विकास का माध्यम बनाया जा रहा है।

पूरे प्रदेश के लिए गर्व का क्षण

पुरस्कार प्राप्त करने के बाद पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि यह सम्मान पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व और खुशी का विषय है। उन्होंने कहा कि राज्य की लोक संस्कृति, कला, हस्तशिल्प और जनजातीय विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह पहचान पर्यटन क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सफलता का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल पर्यटन स्थलों का विकास करना नहीं, बल्कि पर्यटन को स्थानीय लोगों की आजीविका, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ना है।

बस्तर से सिरपुर तक पर्यटन की अलग पहचान

छत्तीसगढ़ की पर्यटन पहचान में बस्तर की जनजातीय संस्कृति, सिरपुर की ऐतिहासिक धरोहर, भोरमदेव मंदिर, चित्रकोट जलप्रपात और तीरथगढ़ जलप्रपात जैसे प्रमुख स्थलों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राज्य सरकार ने इन स्थलों को बेहतर सुविधाओं, सांस्कृतिक आयोजनों और डिजिटल प्रचार के माध्यम से नई पहचान दिलाने का प्रयास किया है।

पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

पर्यटन विभाग का मानना है कि इस सम्मान से राज्य में पर्यटन निवेश बढ़ेगा, पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही, छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।

राष्ट्रीय मंच पर मिला यह सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक समृद्धि, पर्यटन संभावनाओं और दूरदर्शी पर्यटन नीति की बड़ी स्वीकृति है। माना जा रहा है कि यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में राज्य को देश के प्रमुख सांस्कृतिक पर्यटन स्थलों में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।